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MP School SMC New Guidelines 2026 : मध्य प्रदेश में स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) गठन एवं संचालन के नवीन नियम जारी; यहाँ देखें विस्तृत निर्देश व आदेश

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MP School SMC Guidelines 2026: मध्य प्रदेश में स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) गठन एवं संचालन के नवीन नियम जारी; यहाँ देखें विस्तृत निर्देश व आदेश

Samagra Shiksha MP SMC Order 2026, DPI Madhya Pradesh SMC Rules, School Management Committee Structure MP, एकीकृत एसएमसी गठन प्रक्रिया मध्य प्रदेश
MP School SMC New Guidelines 2026
प्रकाशित तिथि: मई 19, 2026 | श्रेणी: स्कूल शिक्षा विभाग (MP Education Department)
विभाग: समग्र शिक्षा (सेकेण्डरी एजुकेशन), लोक शिक्षण संचालनालय, म.प्र. आदेश क्रमांक: क्र./SMC Guidelines-2026/2025-26/2/15
स्थान व दिनांक: भोपाल, दिनांक 18/05/2026 संदर्भ: शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी SMC Guidelines-2026
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SMC Guidelines 2026 Madhya Pradesh, स्कूल प्रबंधन समिति गठन निर्देश
MP School SMC Guidelines 2026: मध्य प्रदेश स्कूल प्रबंधन समिति गठन एवं नवीन नियम जारी - आदेश देखें
MP Education Department ने भारत सरकार के नवीन SMC Guidelines 2026 के तहत शासकीय एवं अनुदान प्राप्त स्कूलों में एकीकृत स्कूल प्रबंधन समिति गठन के विस्तृत निर्देश जारी कर दिए हैं। पूरी प्रक्रिया यहाँ पढ़ें।
Samagra Shiksha MP SMC Order 2026, DPI Madhya Pradesh SMC Rules, School Management Committee Structure MP, एकीकृत एसएमसी गठन प्रक्रिया मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत शासकीय, शासकीय अनुदान प्राप्त और अशासकीय विद्यालयों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI), मध्य प्रदेश द्वारा भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की नवीन School Management Committee (SMC) Guidelines-2026 के अनुपालन में प्रदेश के सभी विद्यालयों में विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के गठन एवं संचालन के संबंध में विस्तृत आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

इस नए आदेश के तहत अब स्कूलों में पुरानी व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव किए गए हैं। अब से पूर्व में संचालित होने वाली स्कूल मैनेजमेंट डेवलपमेंट कमेटी (SMDC) को पृथक से संचालित नहीं किया जाएगा, बल्कि उनके स्थान पर एक विशेष एकीकृत व्यवस्था लागू होगी। आइए इस पोस्ट में विस्तार से जानते हैं कि नवीन गाइडलाइंस के अनुसार एसएमसी का स्वरूप कैसा होगा।

1. एकीकृत SMC का गठन (अब SMDC की छुट्टी)

नवीन निर्देशों के अनुसार, अब प्रत्येक विद्यालय में केवल एक ही एकीकृत विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) का गठन सुनिश्चित किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पूर्व में हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर पर संचालित होने वाली स्कूल मैनेजमेंट डेवलपमेंट कमेटी (SMDC) अब पृथक रूप से संचालित नहीं की जाएंगी। सभी स्तरों के लिए एक ही एकीकृत समिति उत्तरदायी होगी।

2. छात्र नामांकन के आधार पर समिति का आकार (SMC Size)

विद्यालयों में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या (नामांकन) के आधार पर समिति के सदस्यों की संख्या तय की गई है, जो कि निम्नानुसार है:

क्र. विद्यालय में कुल नामांकन निर्धारित सदस्य संख्या
1 100 विद्यार्थियों तक 12 से 15 सदस्य
2 100 से 500 विद्यार्थियों तक 15 से 20 सदस्य
3 500 से अधिक विद्यार्थियों पर 20 से 25 सदस्य

3. समिति की संरचना और आरक्षण नियम

समिति के गठन में पारदर्शिता, समावेशन और महिला प्रतिनिधित्व को अनिवार्य बनाया गया है:

  • अभिभावक प्रतिनिधित्व: समिति के कुल सदस्यों में से न्यूनतम 75 प्रतिशत सदस्य अनिवार्य रूप से विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों के माता-पिता या वैध अभिभावक होंगे।
  • महिला सशक्तिकरण: कुल निर्धारित सदस्यों में से न्यूनतम 50 प्रतिशत महिलाओं का होना अनिवार्य है।
  • वंचित वर्गों का समावेशन: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित समूह (SEDGs) तथा दिव्यांग बच्चों (CWSN) के अभिभावकों को उनकी जनसंख्या और अनुपात के अनुसार समुचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
  • अन्य हितधारक सदस्य: समिति में शिक्षक, स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधि, शिक्षा/विषय विशेषज्ञ, विद्यालय के पूर्व छात्र, स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता को भी सदस्य के रूप में सम्मिलित किया जा सकेगा।

4. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्य सचिव का चयन

समिति के शीर्ष पदों के लिए नियम अत्यंत स्पष्ट और लोकतांत्रिक रखे गए हैं:

  • अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष: इनका निर्वाचन केवल अभिभावक सदस्यों में से ही किया जाएगा। चयन की प्रक्रिया पूरी तरह लोकतांत्रिक और पारदर्शी होगी।
  • सदस्य सचिव: संबंधित विद्यालय का संस्था प्रमुख या प्राचार्य (Principal/Headmaster) ही इस समिति का पदेन सदस्य सचिव होगा।

5. गठन की समय-सीमा एवं अनिवार्य बैठकें

सत्र के सुचारू संचालन हेतु समय-सीमा तय कर दी गई है:

  • गठन की अवधि: नए शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ होने के एक माह के भीतर अनिवार्य रूप से SMC का गठन पूर्ण कर लिया जाना चाहिए।
  • प्रथम बैठक: समिति के गठन के एक सप्ताह (7 दिन) के भीतर पहली बैठक आयोजित करना अनिवार्य है।
  • मासिक समीक्षा बैठक: एसएमसी की बैठक प्रत्येक माह में कम से कम एक बार अवश्य बुलाई जाएगी।
  • कोरम (Quorum): बैठक को वैध मानने के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।
  • पारदर्शिता: बैठक की कार्यवाही का पूरा विवरण (Proceeding Register) संधारित किया जाएगा और इसे सार्वजनिक रूप से विद्यालय के नोटिस बोर्ड या सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शित किया जाएगा।

6. उपसमितियों का गठन

समिति के कार्यों को सुचारू और केंद्रित बनाने के लिए SMC के अंतर्गत दो महत्वपूर्ण उपसमितियों (Sub-Committees) का गठन किया जाएगा:

  1. स्कूल भवन समिति (School Building Committee): जो विद्यालय के बुनियादी ढांचे, रखरखाव और निर्माण कार्यों की देखरेख करेगी।
  2. शैक्षणिक समिति (Academic Committee): जो पठन-पाठन के स्तर, सीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes) और शैक्षणिक गुणवत्ता पर केंद्रित रहेगी।

7. स्कूल विकास योजना (SDP - School Development Plan)

प्रत्येक विद्यालय की एसएमसी द्वारा आगामी तीन वर्षीय स्कूल विकास योजना (SDP) तैयार की जाएगी। इसके अंतर्गत प्रतिवर्ष के लिए वार्षिक उप-योजनाएं भी बनेंगी, जिनमें मुख्यतः निम्न पहलुओं को शामिल किया जाएगा:

  • अधोसंरचना एवं भौतिक संसाधन (Infrastructure)
  • शैक्षणिक गुणवत्ता और मानव संसाधन की उपलब्धता
  • वित्तीय आवश्यकताएं और बजट आवंटन
  • समावेशी शिक्षा संबंधी विशेष आवश्यकताएं

8. SMC की प्रमुख जिम्मेदारियाँ और कार्य क्षेत्र

आदेश के बिंदु क्रमांक 8 में एसएमसी को व्यापक अधिकार और जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिनकी नियमित मॉनिटरिंग समिति को करनी होगी:

  • नामांकन व ठहराव: क्षेत्र के सभी बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करना और स्कूल में उनकी निरंतर उपस्थिति (Retention) की निगरानी करना।
  • समावेशी शिक्षा: दिव्यांग बच्चों (CWSN) सहित सभी वंचित वर्ग के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना।
  • छात्र लाभ वितरण: छात्रों को मिलने वाली विभिन्न शासकीय हितलाभी योजनाओं (यूनिफॉर्म, छात्रवृत्ति, साइकिल आदि) का समय पर वितरण सुनिश्चित कराना।
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: शिक्षकों की उपस्थिति, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया और निपुण भारत (FLN) के लक्ष्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा।
  • बाल सुरक्षा एवं मानसिक स्वास्थ्य: स्कूलों में बाल सुरक्षा, POCSO प्रावधानों का कड़ाई से पालन, एंटी-बुलिंग (रैगिंग रोकना) उपाय और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियों का संचालन।
  • आपदा प्रबंधन: विद्यालय भवन और प्रांगण में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा।
  • शासकीय योजनाओं की निगरानी: समग्र शिक्षा, PM POSHAN (मध्यान्ह भोजन), PM SHRI, ULLAS साक्षरता कार्यक्रम आदि की जमीनी मॉनिटरिंग।
  • छात्रावासों की देखरेख: कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) और नेताजी सुभाष चंद्र बोस (NSCB) छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर नजर रखना।
  • पर्यावरण संरक्षण: विद्यालय परिसर में हरित और सतत गतिविधियों (Sustainable and Green Practices) को बढ़ावा देना।

9. वित्तीय अधिकार और निर्माण कार्य

विद्यालयों को स्वायत्तता देने के उद्देश्य से एसएमसी को वित्तीय अधिकार भी दिए गए हैं। अब 30 लाख रुपये तक के समस्त सिविल (निर्माण) कार्य स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) के माध्यम से सीधे कराए जा सकेंगे। इसके साथ ही, वित्तीय प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी रखने के लिए नियमित रूप से सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) कराया जाना अनिवार्य होगा।

10. क्षमता विकास एवं अनुश्रवण (Monitoring)

समिति के सदस्यों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए स्थानीय भाषाओं में मिश्रित (ऑनलाइन और ऑफलाइन) माध्यम से नियमित क्षमता विकास प्रशिक्षण (Capacity Building Training) आयोजित किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, विकासखंड (Block) एवं जिला स्तर के शिक्षा अधिकारी इस पूरी गठन प्रक्रिया और मासिक बैठकों का नियमित अनुश्रवण (Monitoring) करेंगे। सभी स्कूलों को निर्धारित प्रारूप में अपना मासिक प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से जिला कार्यालय को प्रेषित करना होगा।

संकुल प्राचार्यों को निर्देश: जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे तत्काल अपने जिले के अंतर्गत आने वाले सभी संकुल प्राचार्यों और संस्था प्रमुखों को इन नियमों के अनुसार तय समय-सीमा में एसएमसी का गठन सुनिश्चित करने हेतु आदेश जारी करें।

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